शुक्रवार, 13 जनवरी 2023

संक्रांति कब मनाये

 🙏🏻🚩 ज्योतिषाचार्य कृष्णा शर्मा मै                                       *मकर संक्रांति*  हिंदू पंचांग के अनुसार,बताना चाहुगी, 14 जनवरी दिन शनिवार को सूर्य देव रात 8 बजकर 14 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे,तो रात मे न स्नान कर सकते है न दान निकाल सकते है क्युकी शास्त्र अनुसार रात्रि प्रहर में स्नान, दान-धर्म के कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना सही नहीं है. उदिया तिथि के चलते हम कल 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति का पर्व मनाएंगे।अब जाने 👉🏻

 *मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त* 

15 जनवरी को मकर संक्रांति पर सुबह 07 बजकर 15 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 46 मिनट तक मकर संक्रांति का पुण्यकाल रहेगा. इस अवधि में स्नान, दान-धर्म के कार्य बहुत ही शुभ माने जाते हैं. चूंकि मकर संक्रांति का पर्व रविवार के दिन पड़ रहा है तो इससे त्यौहार का महत्व  बढ़ जाता है, क्योंकि यह दिन सूर्य देव को ही समर्पित है. इसके अलावा, कल दोपहर 12 बजकर 09 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा और दोपहर 02 बजकर 16 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 58 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा.🙏🏻                            आपका संक्रांति का दान अगर शुभ महूर्त मे नहीं निकाला तो आपकी संक्रांति का दान स्नान बेकार है. आप फिर सामान्य पूजा व दान कर रहे हो, सब्र करो साल भर बाद ये त्यौहार आता है जल्दी क्या है कल से ही आप मौसम बदलते भी देखेंगे, क्युकि सूर्य देव दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर अग्रसर यानि चले जाते है इसी लिऐ  सूर्य का ,उतरायण, कहते है। ऐसा इस लिए होता है, की पृथ्वी का झुकाव हर 6,6माह तक निरंतर उतर ओर 6माह दक्षिण कीओर बदलता रहता है। और  यह प्राकृतिक प्रक्रिया है।जो इस संक्रांति पर ही होती है   तो कृपया आप अपना त्यौहार सही महूर्त मे मनाये आज सुबह से सबको बता रही हु😔🙏🏻🚩**ज्योतिषाचार्य कृष्णा शर्मा*     www.krishtaradivyalautrust.org

रविवार, 16 अक्टूबर 2022

अहोई अष्टमी पूजा कथा विधी महूर्त

 *कृषतारा दिव्य लौ ट्रस्ट* 🙏🚩

अहोई अष्टमी का व्रत 17 अक्टूबर सोमवार 2022 को रखा जाएगा.ज्योतिषचार्य कृष्णा शर्मा द्वारा पंचांग के अनुसार अहोई की अष्टमी तिथि का प्रारम्भ  सुबह 09 बजकर 29 मिनट से शुरू होगा और समापन अक्टूबर 18, 2022 को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर होगा.

*अहोई अष्टमी का पूजा मुहूर्त*  शाम 06 बजकर 14 मिनट से शाम 07बजकर 28 मिनट तक रहेगा. तारों को देखने के लिए का समय शाम 06 बजकर 36 मिनट पर रहेगा.

शुभ योग मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 43 मिनट से लेकर सुबह 12 बजकर 29 मिनट तक

विजय मुहूर्त- शाम 5 बजकर 50 मिनट से लेकर 07 बजकर 05 मिनट तक

अब जाने विधि 👉🏻अहोई की पूजा प्रदोषकाल में की जाती है  इस दिन माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु और सुख-सपन्नता के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. फिर रात को तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है.. इस दिन सभी माताएं सूर्योदय से पहले जागती हैं और उसके बाद स्नान करके माता अहोई की पूजा करती हैं. पूजा के लिए अहोई देवी मां की आठ कोने वाली तस्वीर पूजा स्थल पर रखें. मां अहोई के तस्वीर के साथ वहां साही की भी तस्वीर होनी चाहिए. पूजा की प्रक्रिया शाम को प्रारंभ होती है. पूजा की जगह या चौकी को गंगा जल से स्वच्छ करें.इसके बाद इसमें आंटे की चौकोर रंगोली बनाएं. मां की तस्वीर के पास एक कलश भी रखें. कलश का किनारा हल्दी से रंगा होना चाहिए और यह ध्रुव घास से भरा हो. उसके बाद किसी भी मान व बड़ी महिला के मुख से अहोई माता की कथा ज़रूर सुने फिर माता को खीर हलवा पूरी एवं पैसा चढ़ाएं. चंद्रोदय के पश्चात महिलाएं चंद्रमा को जल चढाएं फिर अपना उपवास खोलें.

 *कथा*👉🏻 अहोई अष्टमी व्रत की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक साहूकार रहता था. उसके सात बेटे थे. दीपावली से पहले साहूकार की पत्नी घर की पुताई करने के लिए मिट्टी लेने खदान गई. वहां वह कुदाल से मिट्टी खोदने लगी. खुदाई वाले स्थान पर सेई की एक मांद थी, जहां वो अपने बच्चों के साथ रहती थी. अचानक साहूकार की पत्नी के हाथों से कुदाल सेई के बच्चे को लग गई और उसकी मृत्यु हो गई. साहूकारनी को इसका बड़ा पछतावा हुआ. आखिर में साहूकारनी घर लौट आई.

कुछ समय बाद साहूकारनी के एक बेटे की मृत्यु हो गई. फिर एक के बाद एक उसके सात बेटों की मौत हो गई. वो बहुत दुखी रहने लगी. एक दिन उसने अपने पड़ोसी को सेई के बच्चे की मौत की घटना सुनाई और कहा कि उससे अनजाने में यह पापा हुआ था. परिणाम स्वरूप उसके सातों बेटों की मौत हो गई. यह बात जब सबको पता चली तो गांव की वृद्ध औरतों ने साहूकार की पत्नी को दिलासा दिया.


वृद्ध औरतों ने साहूकार की पत्नी को चुप करवाया और कहने लगी आज जो बात तुमने सबको बताई है. इससे तुम्हारा आधा पाप नष्ट हो गया है. उन्होंने साहूकारनी को अष्टमी के दिन अहोई माता, सेई और उसके बच्चों का चित्र बनाकर उनकी पूजा करने को कहा. ताकि उसकी सारे पाप धुल जाएं.


साहूकार की पत्नी ने सबकी बात मानते हुए कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को व्रत रखा और विधिवत पूजा कर क्षमा मांगी. उसने प्रतिवर्ष नियमित रूप से इस व्रत का पालन किया. आखिरकार उसे सात पुत्र रत्नों की प्राप्ति हुई. कहते हैं कि तभी से अहोई अष्टमी का व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है.बोले अहोई माता की जय 🙏🚩 *ज्योतिषचार्य कृष्णा शर्मा*

संक्रांति कब मनाये

 🙏🏻🚩 ज्योतिषाचार्य कृष्णा शर्मा मै                                       *मकर संक्रांति*  हिंदू पंचांग के अनुसार,बताना चाहुगी, 14 जनवरी द...