गुरुवार, 1 मार्च 2018

सभी मित्रो को होली की हार्दिक शुभकामनायें साथ आज मैं कृष्णा शर्मा आपको बताऊगी कि आप इस होली पर खास उपाय व उसके करने के फायदे महुरत तो बताती हु
होली वसंत ऋतु के आने और सर्दियों के जाने का प्रतीक है. यह शुभ दिन फाल्गुन महीने में पूर्णिमा से पहले पड़ता है.होली के त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। ये आप सभी जानते हैं।
इस बार होली गुरूवार और शुक्रवार होने से होली और भी महत्वपूर्ण है
1 मार्च को सुबह 8 बजकर 58 मिनट पर पूर्णिमा तिथि लग रही है.अर्थात् 1 मार्च को होलाष्टक समाप्ति के साथ होलिका दहन होगा और 2 मार्च को रंगों के साथ त्योहार मनाया जाएगा।
शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल के दौरान करना चाहिए लेकिन ध्यान रखें कि जब भद्राकाल चल रहा हो तो इस दौरान होलिका दहन नहीं करना चाहिए। भद्राकाल के समय होलिका दहन शुभ नहीं माना जाता है । इससे अशुभ फल प्राप्त होता है। शाम में 7 बजकर 37 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगा इसके बाद से होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा।

होलिका पूजन मुहूर्त-
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6.26 मिनट से लेकर 8.55 मिनट तक है।

पूजा विधि =

होलिका दहन से पहले दहन की शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजा करनी चाहिए ,फिर होलिका को अग्नि दी जनि चाहिए । पूजा के लिए जल,रोली,बताशे ,नारियल गोबर के बड़कुले की माला, फूल माला,चावल गुड़ और नई पकी फसल की बालियां रखें।होलिका दहन के शुभ मुहूर्त के समय मालाएं होलिका को अर्पित की जाती है। इसके बाद तीन या सात बार कच्चे सूत को लपेटते हुए होलिका का परिक्रमा करे,साथ ही मन्त्र बोलते रहे ॐ नमो भगवते विष्णु। । गर्भवती महिला ज़रूर पूजन करे इससे सकरात्मता प्राप्त होती है। घर में सुख सृमद्धि के लिए अच्छा होता है। कहीं-कहीं होलिका की आग घर ले जाई जाती है। उस आग से घर में रोटी बनाने को शुभ माना जाता है।इस पवित्र अग्नि में जौ को भूनकर अपने प्रियजनों के बीच बांटते हैं ऐसा माना जाता है कि आग में जौ जलाने से सभी तरह की समस्याएं नष्ट हो जाती है और जीवन में सकारात्मकता आती है
कहा जाता है कि होली शब्द हिरण्याकश्यप की बहन होलिका के नाम पर पड़ा है। कहा जाता है कि होलिका के पास एक ऐसा कपड़ा था जिसे पहन पर आग में नहीं जलते थे। होलिका ने अपने भाई की बात मानते हुए हिरण्याकश्यप के बेटे प्रह्लाद को लेकर होलिका चिता पर बैठ गई थी। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होली जल कर भस्म हो गई और प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। तभी से इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।
और इसी दिन श्री कृष्ण ने पूतना राक्षसी का वध किया था इसी ख़ुशी में गोकुल वासियो ने रंगो से फूलो से होली खेली ,फिर श्री राधा रानी और श्री कृष्ण ने होली खेली। बरसाना मथुरा वृन्दावन की होली बसंत पंचमी और होली अष्टक से ही प्रारम्भ हो जाती है।
होली के खास उपाय _
१) व्यापार नौकरी या जीवन की परेशानी के लिए होली की रात बारह बजे से पहले एक दाग रहित बड़ा नींबू लेकर चौराहे पर जाएं और उसकी चार फांक कर चारों कोनों में फेंक दें। फिर वापिस घर जाएं किंतु ध्यान रहे, वापिस लौटते समय पीछे मुड़कर न देखें। सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

२) व्यापार में लाभ व् आर्थिक लाभ के लिए होली के दिन गुलाल के एक खुले पैकेट में गोमती चक्र ,कमल गट्टे के ५ बीज और चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल रेशमी कपड़े में मौली से बांधकर तिजोरी में रखें, लाभ होगा।

३)होली की रात होली की रख घर के चारो तरफ फेक दे. इससे आपके घर में कोई नकारातमक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पायेगी।

४)होली की राख का तिलक करने से देवी देवता प्रसन्न होते है। और शुभ काम पर जाने से पहले गर्दन के पीछे लगाकर जाने से काम बनते है। .

५) नारियल और निम्बू की आहुति से सारे कष्ट दूर होते है।

६) चीनी की आहुति १०८ बार देते हुए लक्ष्मी मन्त्र जाप करने से आर्थिक कष्ट से मुक्ति मिलती है और धन लाभ होता है। मन्त्र ; ॐ ह्री श्रीं विष्णु प्रिये नमः। .

७) अपने पितृ और देवी देवताओ व् पीपल वृक्ष की दिप जलाकर खीर का भोग लगाने से कृपा प्राप्त होती है।

८) पीपल के नीचे पत्तल पर भोजन और मीठा रखकर गुलाल से पूजन करके मिटटी के पात्र में जल रखकर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्राथना प्रभु से करे
आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ
ज्योतिषाचर्या कृष्णा शर्मा

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